लैलूंगा

नगर पंचायत लैलूंगा में प्रधानमंत्री आवास योजना में व्यापक धांधलीफर्जी हितग्राही ने चार साल बाद राशि जमा करायीआवास निर्माण ही नही एवं आवास की राशि अन्य के खाते में डाली गयी

नगर पंचायत लैलूंगा में प्रधानमंत्री आवास योजना में व्यापक धांधली
फर्जी हितग्राही ने चार साल बाद राशि जमा करायी
आवास निर्माण ही नही एवं आवास की राशि अन्य के खाते में डाली गयी
संविदाकर्मि से बने प्रभारी सीएमओ सी पी श्रीवास्तव के कार्यकाल का कारनामा

लैलूंगा- नगर पंचायत लैलूंगा में प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) में जमकर धांधली सामने आ रही है। संविदाकर्मि से प्रभारी सीएमओ बने सी पी श्रीवास्तव ने धांधली व भ्रष्टाचार का खुला खेल खेला। परत दर परत कारनामे की कलाइयां खुलती जा रही हैं। सूचना के अधिकार में मिली जानकारी के अनुसार आवास की राशि हितग्राही के खाते में न डालकर दूसरे के खाते में डाली गयी।मामला प्रकाश में आते ही आनन फानन में दिनांक 07.08.2024 को नगर पंचायत लैलूंगा के निकाय खाता क्रमांक 11275701342 में राशि 195899 जमा करा दी गयी।राशि जमा करने से पूर्व वर्तमान लेखापाल या मुख्यनगरपालिका अधिकारी को जानकारी तक नही दिया गया।

पीएमएवाई (शहरी) के अंतर्गत
किफायती आवास के लिए एवं सभी के लिए आवास की सुविधा प्रदान करने के लिए केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री आवास योजना महत्वाकांक्षी योजनाओं में से एक है।जिसमे मिशन के तहत लाभार्थी परिवार में पति, पत्नी, अविवाहित बेटे और/या अविवाहित बेटियाँ शामिल हैं।
लाभार्थी परिवार के पास भारत के किसी भी हिस्से में अपने या अपने परिवार के किसी भी सदस्य के नाम पर पक्का घर (सभी मौसम में रहने लायक आवास इकाई) नहीं होना चाहिए।
एक वयस्क कमाने वाले सदस्य (वैवाहिक स्थिति पर ध्यान दिए बिना) को एक अलग परिवार माना जाता है बशर्ते कि उसके पास भारत के किसी भी भाग में अपने नाम से कोई पक्का मकान (सभी मौसमों में रहने योग्य आवास) नहीं है।विवाहित जोड़े के मामले में, पति-पत्नी में से कोई एक या दोनों संयुक्त स्वामित्व में एक ही घर के लिए पात्र होंगे, बशर्ते कि योजना के तहत परिवार की आय पात्रता हो। पात्र लाभार्थी मिशन के चार में से केवल एक ही कार्यक्षेत्र का लाभ उठा सकता है।
इसके अलावा, ऐसे व्यक्ति जिनके पास पक्का मकान है और निर्मित क्षेत्रफल 21 वर्ग मीटर से कम है, उन्हें मौजूदा आवासीय इकाइयों को 30 वर्ग मीटर तक बढ़ाने के लिए शामिल किया जा सकता है। हालांकि, अगर भूमि/स्थान की उपलब्धता की कमी या किसी अन्य कारण से वृद्धि संभव नहीं है, तो वह पीएमएवाई (यू) के तहत कहीं और घर ले सकता है।
नगर पंचायत लैलूंगा में प्रभारी मुख्य नगरपालिका अधिकारी रहे सी पी श्रीवास्तव के काले कारनामे एक एक कार सामने आ रहे हैं। चर्चित ट्यूबर पोल लाइट घोटाला की जांच रिपोर्ट पर शासन से कार्यवाही लंबित है अब प्रधानमंत्री आवास योजना में भ्रष्टाचार उजागर हुआ है।नियम के विपरीत पति सुखदेव शाह एवं पत्नी मीना शाह दोनों के नाम से आवास स्वीकृत हुआ। मीना शाह का मकान बना और राशि मिल गयी। सुखदेव शाह का आवास बनाया ही नही गया। ग्राउंड रिपोर्ट में जनकर्म संवाददाता ने पाया कि हितग्राही सुखदेव शाह की चार किश्त की राशि सुखदेव सिदार के खाते में अंतरित की गयी और आहरण भी कर लिया गया। दरअसल सुखदेव शाह दंपति के नाम से स्वीकृति देकर एक आवास की राशि का गबन का प्लान बनाया गया था। जिसके लिए बाकायदा मिलता जुलता नाम का हितग्राही खोजा गया। पूर्व पंचायत कर्मी सुखदेव सिदार के खाते में सुखदेव शाह की राशि डाली गयी। मामला उजागर होने एवं फंसने के डर से राशि निकाय खाते में चार साल बाद वापस कर दी गयी है।

जब आवास बना ही नही तो जिओटैग व फ़ोटो अपलोड भी फर्जी

भुगतान के दोषी मुख्य नगरपालिका अधिकारी, इंजीनियर, के साथ निजी कंपनी के कर्मचारी आवास मित्र, CLTC (सिटी लेबल टेकनीकल कंसल्टेंट)
आवास स्वीकृत होने के बाद बोलचाल की भाषा मे आवास मित्र यानी सर्वेयर स्वीकृत स्थल का जिओटैग करता है।एवं सिटी लेबल टेकनीकल कंसल्टें निर्माण स्थल की फ़ोटो अपलोड करता है। फ़ाइल में नोटसीट इंजीनियर के लिखने के बाद भुगतान अधिकारी डीबीटी के माध्यम से राशि हितग्राही के खाते में डालता है। हितग्राही सुखदेव शाह के मामले में इन चारों ने शासकीय राशि गबन की साजिश रची।बिना आवास बनाये फर्जी जिओटैग, फोटो अपलोड,इंजीनियर की फर्जी नोटशीट, हितग्राही की जगह मिलता जुलता नाम के खाते में भुगतान प्रथम दृष्टया ही शासकीय राशि के गबन की साजिश रचने के प्रमाण सामने आ गए है।