लैलूंगा

लैलूंगा के झरन में नवरात्रि दुर्गा पूजा पर महाकुल समाज का हाड़ी बाजा जलवा, परंपरा और आस्था का मिला संगम

लैलूंगा के झरन में नवरात्रि दुर्गा पूजा पर महाकुल समाज का हाड़ी बाजा जलवा, परंपरा और आस्था का मिला संगम

लैलूंगा क्षेत्र के ग्राम झरन हाड़ी बाजा में इस वर्ष नवरात्रि के पावन अवसर पर महाकुल यादव समाज द्वारा आयोजित दुर्गा पूजा महोत्सव ने पूरे इलाके में अलग ही छटा बिखेर दी। पीढ़ियों से चली आ रही इस परंपरा ने इस बार भी लोगों को सामाजिक एकता और धार्मिक आस्था के सूत्र में बांध दिया। ढोल-नगाड़ों और हाड़ी बाजा की गूंज से गांव का वातावरण भक्तिमय हो उठा।

इस ऐतिहासिक आयोजन में महाकुल समाज के बड़े पदाधिकारी भी शामिल हुए। महाकुल समाज प्रदेश अध्यक्ष परमेश्वर यादव ने पूजा पंडाल पहुंचकर माता रानी का आशीर्वाद लिया और समाज को एकता का संदेश दिया। वहीं जिला अध्यक्ष दुकालू राम यादव और जिला उपाध्यक्ष दीपक सिदार ने भी अपनी गरिमामयी उपस्थिति से कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। उनकी अगुवाई में समाज के युवा और वरिष्ठजन भारी संख्या में शामिल हुए।

पूरे कार्यक्रम का आयोजन शुक्रवार, पंचमी तिथि (26.09.2025) को किया गया। भक्तों ने भक्ति गीतों, जसगीत और पारंपरिक नृत्यों के माध्यम से देवी दुर्गा की आराधना की। महिलाएं और युवा पूरे जोश के साथ झूमते-नाचते नजर आएं। खास बात यह रही कि यहां की विशेष पहचान हाड़ी बाजा ने पूरे माहौल को दिव्य बना दिया। ढोल की थाप और झंकारती थालियों की गूंज ने गांव-गांव से आए श्रद्धालुओं को झूमने पर मजबूर कर दिया।

परंपरा को जीवंत बनाए रखने वाले इस आयोजन ने यह साबित कर दिया कि महाकुल यादव समाज न केवल अपनी धार्मिक आस्थाओं को संजोए हुए है, बल्कि अपनी संस्कृति और लोक परंपरा को भी आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने के लिए कटिबद्ध है। समाज के बुजुर्गों ने भी इस अवसर पर अपने अनुभव साझा किए और युवाओं को समाज सेवा व संस्कृति संरक्षण का आह्वान किया।

पूरे क्षेत्र से जुटी भीड़ ने झरन हाड़ी बाजा को गांव को मेले का रूप दे दिया। श्रद्धालुओं ने दर्शन के बाद भंडारे का प्रसाद ग्रहण किया और माता रानी से सुख-समृद्धि की कामना की। आयोजन समिति के सदस्यों ने व्यवस्था को पूरी तरह संभाले रखा, जिससे बाहर से आए अतिथियों और श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की दिक्कत न हो।

यह कहना गलत नहीं होगा कि झरन हाड़ी बाजा में इस बार की नवरात्रि दुर्गा पूजा ने समाज में नई ऊर्जा, नई उमंग और नई दिशा देने का काम किया है। महाकुल समाज के इस संगठित प्रयास ने पूरे क्षेत्र में धार्मिक एकता और सांस्कृतिक धरोहर की मिसाल कायम की।

कुल मिलाकर, नवरात्रि की पंचमी पर झरन की धरती पर महाकुल समाज की आस्था और परंपरा का ऐसा अद्भुत संगम देखने को मिला, जिसने सभी को भावविभोर कर दिया।