रायगढ़

0चक्रधर समारोह 2025: पद्मश्री डॉ. अश्विनी भिडे देशपाण्डे की स्वर साधना से गूँजा रायगढ़

चक्रधर समारोह 2025: पद्मश्री डॉ. अश्विनी भिडे देशपाण्डे की स्वर साधना से गूँजा रायगढ़

शास्त्रीय गायन की विविध विधाओं खयाल, भजन और ठुमरी की प्रस्तुति से दर्शक हुए भावविभोर

जयपुर अतरौली घराने की परंपरा से निकली मधुर स्वर लहरियाँ

रायगढ़, 1 सितम्बर 2025/ अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त चक्रधर समारोह के मंच पर मुंबई की सुप्रसिद्ध शास्त्रीय गायिका एवं पद्मश्री से सम्मानित डॉ.अश्विनी भिडे देशपाण्डे ने अपनी सुमधुर प्रस्तुति से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। जयपुर अतरौली घराने की प्रतिनिधि डॉ.देशपाण्डे ने शास्त्रीय गायन की विविध विधाओं खयाल, भजन और ठुमरी प्रस्तुत कर सुर, ताल और भाव का ऐसा संगम रचा कि दर्शक भावविभोर हो उठे।
बता दे कि डॉ.अश्विनी भिडे देशपाण्डे का जन्म संगीत परंपरा से जुड़े परिवार में हुआ। उन्होंने नारायण राव दातार से प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की और अपनी माता माणिक भिड़े से जयपुर अतरौली घराने की गहन तालीम ली। वे गान सरस्वती किशोरी आमोनकर की शिष्या रही हैं और देश-विदेश के अनेक प्रतिष्ठित मंचों पर अपनी गायकी का जादू बिखेर चुकी हैं। भारत सरकार ने उन्हें वर्ष 2025 में पद्मश्री सम्मान से अलंकृत किया। साथ ही उन्हें संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार और माणिक रत्न पुरस्कार सहित अनेक विशिष्ट सम्मानों से भी नवाजा गया है। वह न केवल श्रेष्ठ गायिका हैं बल्कि कुशल बंदिशकार भी हैं। उनकी रचनाओं पर आधारित पुस्तक प्रकाशित हो चुकी है। विशेष रूप से कबीर भजनों की प्रस्तुति के लिए उन्हें विशेष पहचान प्राप्त है। डॉ.देशपाण्डे के सुरमयी गायन ने चक्रधर समारोह की गरिमा को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया।