लैलूंगा

अंगेकेला गाँव में बाजे-गाजे के साथ भोजली विसर्जन सम्पन्न, पूरे गांव में खुशी की लहर….

अंगेकेला गाँव में बाजे-गाजे के साथ भोजली विसर्जन सम्पन्न, पूरे गांव में खुशी की लहर….

लैलूंगा से तेज साहू की रिपोर्ट…

लैलूंगा। छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक परंपराओं में से एक, भोजली उत्सव का भव्य आयोजन लैलूंगा ब्लॉक के अंगेकेला गाँव में बड़े हर्षोल्लास के साथ सम्पन्न हुआ। बाजे-गाजे और पारंपरिक गीत-संगीत के बीच भोजली विसर्जन किया गया, जिससे पूरे गाँव का माहौल आनंद और उत्साह से भर उठा।

🌿 भोजली उत्सव का महत्व

भोजली पर्व छत्तीसगढ़ की ग्रामीण और शहरी दोनों ही परंपराओं का हिस्सा है। यह त्योहार न केवल खेती-किसानी और हरियाली का प्रतीक है, बल्कि भाईचारे और सामाजिक एकता को भी मजबूत करता है। कुंवारी लड़कियां और महिलाएं गेहूं या जौ के बीजों को टोकरियों में बोकर उनकी सेवा करती हैं। पवित्र अंधेरे स्थान पर रखे गए इन अंकुरित पौधों को भोजली देवी का रूप माना जाता है।

महिलाएं भोजली सेवा गीत गाते हुए अच्छी फसल, सुख-समृद्धि और स्वास्थ्य की कामना करती हैं। नवखाई पर्व पर इन पौधों को नदी या तालाब में विसर्जित किया जाता है। इस दौरान महिलाएं सिर पर भोजली की टोकरी रखकर पारंपरिक मंगलगीत गाते हुए झांझ-मंदर की थाप पर घाट तक पहुँचती हैं। यह दृश्य देखने योग्य और अत्यंत मनमोहक होता है।

🤝 ‘भोजली बदना’ की परंपरा

भोजली उत्सव की सबसे अनोखी परंपरा है ‘भोजली बदना’। इसमें महिलाएं या लड़कियां भोजली की बाली को एक-दूसरे के कान में लगाकर मित्रता का आजीवन रिश्ता निभाती हैं। इस रिश्ते में वे एक-दूसरे को नाम से नहीं पुकारतीं, बल्कि “भोजली” या “महाप्रसाद” कहकर संबोधित करती हैं। यह परंपरा जीवनभर कायम रहती है और समाज में स्नेह और विश्वास की मिसाल प्रस्तुत करती है।

🙏 महिलाओं की सहभागिता

इस बार अंगेकेला गाँव में भोजली सेविका के रूप में –
रीना डेल्की, गीतांजलि सिदार, सपना पहाड़ी, कांति सिदार, ज्योति सिदार, रितु साहू, मोनिका सिदार, रामशिला यादव सहित अनेक महिलाएं शामिल हुईं और पूरे उत्सव को भक्ति और उल्लास से भर दिया।

भव्य भोजली विसर्जन एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम में गाँव और आसपास के कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। इनमें प्रमुख रूप से –
राजू ठाकुर (विद्युत मंडल बगीचा), तेज साहू (पत्रकार), नारायण सिदार (सहायक सचिव ग्राम पंचायत रेगडी), मनोहर प्रधान (भूतपूर्व BDC झगरपुर), ओमप्रकाश निषाद, चंद्रप्रकाश (डेको कोल माइनस तमनार), सुरेश साहू (साहू ढाबा गोसाईडीह), दुष्यंत पैकरा (पैकरा टूर एंड ट्रेवल्स रेगडी), सोनू साहू, श्याम सुंदर सिदार, ओमसिंह, राजनाथ सिंह (पटेल) सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद थे।

✨ संस्कृति, आस्था और एकता का संदेश

भोजली पर्व केवल धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन ही नहीं, बल्कि किसानों की मेहनत, महिलाओं की श्रद्धा और समाज की एकता का भी प्रतीक है। यह त्योहार पीढ़ी दर पीढ़ी छत्तीसगढ़ की लोक परंपराओं को जीवित रखे हुए है और हर बार लोगों को नई ऊर्जा और उत्साह प्रदान करता है।